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    <title>Mukhbirmp hindi news portal &amp; : मुखबिर विशेष</title>
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    <description>Mukhbirmp hindi news portal &amp; : मुखबिर विशेष</description>
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    <dc:rights>Copyright 2022 Mukhbirmp &amp; All Rights Reserved. | Managed By Applizor Softech Private Limited</dc:rights>
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        <title>जब 25 साल बाद मिले दो बैचमेट चेहरे पर झुर्रियां और आंखों पर सवाल लेकिन जुवान में झिझक</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/When-two-batchmates-meet-after-25-years,-wrinkles-on-their-faces,-questions-in-their-eyes,-but-hesitation-in-their-tongues</link>
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 15:50:50 +0530</pubDate>
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        <title>एमपी में तेजी से बढ़ रही कुंवारे लड़कों की संख्या,लड़कों के माता&amp;पिता शादी ढूंढ कर हो रहे परेशान</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/The-number-of-bachelors-is-increasing-rapidly-in-Madhya-Pradesh-and-parents-are-finding-it-difficult-to-find-a-match</link>
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        <pubDate>Mon, 20 Oct 2025 13:24:15 +0530</pubDate>
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        <title>‘आखिर सिंधिया करना क्या चाहते हैं’ भाजपा नेताओं के लिए सिंधिया बने पहेली,बूझने का प्रयास कर रहे भाजपा के नेता और राजनीतिक विश्लेषक</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/What-does-Scindia-want-to-do-after-all-Scindia-has-become-a-puzzle-for-BJP-leaders,-BJP-leaders-and-political-analysts-are-trying-to-solve-him</link>
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        <pubDate>Sun, 01 Dec 2024 11:21:16 +0530</pubDate>
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        <title>भाजपा और कांग्रेस के एजेंडे में नहीं सामान्य वर्ग,हरियाणा चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी ने एससी,एसटी और ओबीसी का लिया नाम सवर्ण का नहीं किया जिक्र</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/General-category-is-not-in-the-agenda-of-BJP-and-Congress,-after-winning-Haryana-elections,-PM-Modi-took-the-names-of-SC,-ST-and-OBC-but-did-not-mention-upper-castes</link>
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        <pubDate>Sun, 13 Oct 2024 09:27:29 +0530</pubDate>
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        <title>कांग्रेस के नामांतरण में पटवारी की लापरवाही,पट्टे के लिए दिल्ली से भोपाल तक भटक रहे सैकड़ों दावेदार</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/Negligence-of-Patwari-in-transfer-of-name-of-Congress,-hundreds-of-claimants-are-wandering-from-Delhi-to-Bhopal-for-lease</link>
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        <pubDate>Sun, 28 Jul 2024 08:37:25 +0530</pubDate>
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        <title>ऐसा लगता है चाय की मिठास अब फीकी पड़ने लगी है,मीठी करने के चक्कर में चाय के फटने का डर भी है,लेकिन दूसरा कोई रास्ता भी नहीं</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/It-seems-that-the-sweetness-of-the-tea-has-started-to-fade,-there-is-a-fear-of-the-tea-bursting-while-trying-to-sweeten-it,-but-there-is-no-other-way</link>
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        <pubDate>Sun, 21 Jul 2024 09:05:35 +0530</pubDate>
        <dc:creator>mukhbirmp@gmail.com</dc:creator>
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        <title>भाजपा और कांग्रेस के लिए विंध्य बना वोट &amp;apos;मशीन&amp;apos; तैयार नहीं कर पाए नेत्रृत्व</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/Vindhya-becomes-vote-machine-for-BJP-and-Congress</link>
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        <description><![CDATA[ राजनीतिक पार्टियों के लिए विंध्य (vindhya politics) हमेशा वोट की एक मशीन की तरह रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी का स्वर्गवास होने के बाद कांग्रेस इस क्षेत्र से विलुप्त हो गई और भाजपा ने लगातार जीत का पर्चम लहराया। लेकिन भाजपा के लिए विंध्य हमेशा वोटिंग मशीन से ज्यादा और कुछ नहीं रहा। 30 विधानसभा क्षेत्र वाले विंध्य में एकतरफा बीजेपी की सीटें आ रही हैं लेकिन भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ला के अलावा यहां से किसी अन्य चेहरे को तरजीह नहीं दी। जबकि राजेन्द्र शुक्ला का आम आदमी से कोई सरोकार नहीं वो सिर्फ वीवीआपी लोगों के नेता हैं आम नागरिक की पहुंच से वो काफी दूर हैं। गिरीश गौतम ने लगातार पांच बार विधानसभा का चुनाव जीता लेकिन उन्हे पार्टी ने कभी महत्व नहीं दिया। दिब्यराज सिंह लगातार तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं लेकिन उन्हे भी पार्टी ज्यादा महत्व नहीं दे रही है। सीधी से केदारनाथ शुक्ला कई बार विधायक रहे उन्हे पार्टी ने कभी महत्व नहीं दिया अंत में पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया। सतना की बात करें तो वहां से भी भाजपा ने किसी नेता को महत्व नहीं दिया। मतलब साफ है कि भाजपा के एमपी का जो नेत्रृत्व है वो विंध्य में बड़े नेताओं को तैयार नहीं होने देना चाहता। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को मालूम है कि अगर विंध्य से बड़े नेता तैयार होंगे तो ग्वालियर-चंबल,बुंदेलखंड और मालवा-निमाड़ का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। इसी लिए भाजपा के संगठन की तरफ से विंध्य में नेत्रृत्व तैयार नहीं होने दिया जाता है। कांग्रेस की तरफ से नेत्रृत्व तैयार करने का प्रयास जरुर हुआ लेकिन कमलेश्वर पटेल पर कांग्रेस ने दांव लगाया जिस पर क्षेत्र की जनता विश्वास नहीं करती। कमलेश्वर पटेल कुर्मी समाज से आते हैं और कट्टर कुर्मी के रुप में उनकी पहचान है। महज 15 महीने की सरकार में उनके बंगले पर कुर्मी समाज के अलावा किसी और वर्ग को महत्व नहीं दिया गया। यही कारण है कि आज लोकसभा चुनाव में कमलेश्वर पटेल की हालत खराब है। अजय सिंह (राहुल) के रुप में कांग्रेस के पास जरुर एक बड़ा चेहरा विंध्य में था लेकिन कांग्रेस ने उन्हे लगातार उपेक्षित कर अजय सिंह के राजनीतिक कैरियार को अंत की ओर अग्रसर कर दिया है। कुल मिला कर विंध्य क्षेत्र भाजपा और कांग्रेस के लिए वोट मशीन से ज्यादा कुछ नहीं है। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 14 Apr 2024 14:17:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>mukhbirmp@gmail.com</dc:creator>
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        <title>एक ऐसा नायक जो सबकुछ करके भी नहीं लेता क्रेडिट,कौन है वो नायक...</title>
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        <description><![CDATA[ चुनाव जीतने के लिए सभी राजनीति करते हैं लेकिन जो दूसरों को जिताने के लिए राजनीति करे वो असल में नायक कहलाता है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि वो सबकुछ करके भी कोई क्रेडिट नहीं लेता। बात करते हैं साल 2019 की जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं बनी। महज कुछ सीटों के अंतर से भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। भाजपा के कई नेताओं की राजनीतिक विरासत खतरे में पड़ गई। ऐसे में भाजपा का एक ऐसा नेता सामने आया जिसे &#039;संकट मोचक&#039; भी कहा जाता है। कट्टर हिंदुत्व की छवि तो उनमें दिखती ही है साथ ही प्रदेश के हर जिले का ब्राह्मण उन्हे अपना नेता मानता है। वो नाम है डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) जिसने राजनीति में कभी हारना नहीं सीखा है। कहते हैं कुछ लोग जीवन में इतने संघर्ष करके आगे आते हैं कि छोटे मोटे राजनीतिक झटके उसके लिए कोई मायने नहीं रखते उन्ही में हैं डॉ. नरोत्तम मिश्रा। बीजेपी की सरकार जा चुकी थी उस वक्त उन्होने केन्द्रीय नेत्रृत्व को भरोसा दिलाया कि वो कांग्रेस की सरकार गिरा सकते हैं एक-दो मीटिंग में तो केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया लेकिन नरोत्तम मिश्रा तो उन नायकों में हैं जो एक बार कदम बढ़ा देते हैं तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखते। आखिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे केन्द्रीय नेत्रृत्व भी झुका और आपरेशन लोटस की अनुमति दे दी। इस आपरेशन को सफल बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा जुट गए और वो दिन आया कि जब कांग्रेस के डेढ़ दर्जन विदायक अचानक गायब हो गए। आखिर कांग्रेस की सरकार गिर गई। यहां भी सबकुछ करने के बाद भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हाथ सीएम पद की कुर्सी नहीं बल्कि गृह मंत्रालय हाथ लगा। सबकुछ करके भी पूर्व गृह मंत्री ने किसी प्रकार का क्रेडिट नहीं लिया। साढ़े तीन साल सरकार चलने के बाद विधानसभा चुनाव हुआ और वो सियासत का नायक खुद चुनाव हार गया। हांलाकि राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बढ़ते राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हे हराया गया है। लेकिन कभी न हार मानने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने यह साबित किया कि उन्हे कितना भी दरकिनार किया जाए लेकिन वो कभी हार नहीं मानते। ज्वाइनिंग कमेटी का उन्हे संयोजक बना दिया गया और जिस दिन से उन्हे नई जिम्मेदारी मिली कांग्रेस में भगदड़ मच गई। कांग्रेस के पूर्व विधायक से लेकर पूर्व सांसद और अन्य पदाधिकारियों सहित कांग्रेस के हर छोटे बड़े नेताओं के बीजेपी में आने का सिलसिला शुरु हो गया। छह अप्रैल भाजपा का स्थापना दिवस होता है इस दिन को यादगार बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने एक लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा और एक दिन में एक लाख 26 हजार से ज्यादा नए कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का कीर्तिमान रच दिया। ओवरआल तीन महीने की ज्वाइनिंग के आंकड़े की बात करें तो दो लाख 58 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हुए। इन सबके बीच जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया तो उन्होने पूरा श्रेय पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को दिया और कहा कि उन्ही के नेत्रृत्व से प्रभावित होकर सभी लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं। मतलब साफ है कि सबकुछ करके सारा श्रेय भी किसी दूसरे को कैसे दिया जाता है। यह बात पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा में देखने को मिली इसी लिए लोग उन्हे राजनीति का नायक और चाणक्य कहते हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Apr 2024 13:14:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>mukhbirmp@gmail.com</dc:creator>
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        <title>आखिर चर्चा में क्यों है मध्यप्रदेश कैडर की 2 महिला आईएएस</title>
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        <description><![CDATA[ मध्य प्रदेश कैडर की 2 महिला आईएएस (mp women ias) इन दिनों अपने रौबदार  अंदाज के लिए चर्चा में हैं । आईएएस की नौकरी को उन्होंने शासकीय तंत्र के दुरुपयोग का साधन बना लिया है। जानकारी के मुताबिक यह महिला अधिकारी जिस विभाग में पदस्थ रहती हैं उसके संसाधनों पर अपना स्थाई कब्जा जमा लेती हैं। जिसकी वजह से वे इन दिनों प्रशानिक गलियारों के अलावा राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। बता दें कि दोनों महिला आईएएस अधिकारी राज्य शासन के एक निगम में एमडी रह चुकी है। एमडी रहते हुए उन्होंने निगम में अटैच एक कार को अपने आधीन रख लिया। जिसका 40 हजार रुपए महीना किराया एवं पेट्रोल–डीजल का खर्च हर महीने निगम द्वारा वहन किया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि इनके बाद निगम में जितने भी एमडी आए किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। और पिछले 2 साल से लगातार भुगतान किया जा रहा है। इनके अलावा  एक और महिला आईएएस निगम की एमडी बनकर आई। 
उन्होंने निगम के 4 भृत्य को अपने बंगले पर रख लिया।  कर्मचारी और गाड़ी बार बार बुलाने के बाद भी डर के कारण नहीं आ रहे है।  पिछले करीब डेढ़ साल से चारों भृत्या की सैलरी भी निगम दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक  इसकी वजह से निगम को हर साल लाखों रुपए का नुकसान भी हो रहा है। एक तरफ तो जहां मोहन सरकार कर्ज लेकर सरकार चला रही है वहीं दूसरी ओर सरकार मे बैठे अधिकारी जमकर अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश की मोहन सरकार को सभी निगम मंडल में अटैच गाड़ी और बंगलों पर ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों जानकारी मांगकर फिजूलखर्ची पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।


हृदेश धारवार ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 17:22:52 +0530</pubDate>
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        <title>विंध्य की राजधानी का चुनावी सर्वे: क्या कहता है विंध्य,अबकी बार किसकी सरकार...</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/Election-survey-of-the-capital-of-Vindhya-What-does-Vindhya-say-whose-government-this-time</link>
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        <description><![CDATA[ मप्र में विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीति पूरे शबाब पर है (MP Elections)। विंध्य में हर व्यक्ति यही बात कर रहा है अबकी बार किसकी सरकार। विंध्य की तासीर भी ऐसी है कि वहां का एक छोटा सा बच्चा भी राजनीति की बात करता है और उसका राजनीतिक ज्ञान भी कमाल का ही रहता है (Vindhya Range)। गांव में ठंड के सीजन में अलाव जलता है वहां बैठे लोग प्रदेश की राजनीति तय कर देते हैं वो यहां तक बता देते हैं कि इस बार प्रदेश का मुखिया कौन होगा। अब बात करते हैं विंध्य में कौन किस पर भारी पड़ सकता है (Vindhya Politics)। रीवा की त्योंथर विधानसभा सीट में बसपा अथवा भाजपा का वर्चश्व रहता है जब भी कांग्रेस और भाजपा ने त्योंथर से ब्राम्हण को चुनाव मैदान में उतारा है तब हमेशा बसपा ने जीत दर्ज की है। पिछले दो चुनाव से बीजेपी ही जीत दर्ज कर रही है क्योंकि कांग्रेस रमाशंकर पटेल (कुर्मी) को अपना उम्मीदवार बना रही है। और इस चुनाव में फिर कांग्रेस ने भाजपा को वाकओवर देते हुए दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Rama Shankar Patel) को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतार दिया है। देवतालाव की बात करें तो कुर्मी बाहुल सीट है यहां से गिरीश गौतम (Girish Gautam) तीन बार से विधायक हैं लेकिन बसपा यहां से मजबूत रहती है यहां भी अगर भाजपा के बाद कांग्रेस ब्राम्हण को चुनाव मैदान में उतारती है बसपा का उम्मीदवार देवतालाव से जीत दर्ज करता है। मनगंवा आरक्षित सीट है पहले श्रीनिवास तिवारी फिर गिरीश गौतम और अब पंचूलाल प्रजापति (Panchulal Prajapati) वहां से विधायक हैं माना जा रहा है कि गिरीश गौतम ने पंचूलाल प्रजापति को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी ली है इसलिए उन्हे भाजपा एक बार फिर टिकट दे सकती है। मऊगंज आम तौर पर कांग्रेस अथवा बसपा की पारंपरिक सीट मानी जाती है यहां का मतदाता हमेशा चौकाने वाले फैसले करता है। कभी लक्ष्मण तिवारी (Laxman Tiwari) जैसे नेता लोकजन शक्ति पार्टी से चुनाव जीत जाते हैं तो कभी सुखेन्द्र सिंह बन्ना (Sukhendra Singh Banna) कांग्रेस से चुनाव जीत जाते हैं पिछली बार भाजपा उम्मीदवार प्रदीप पटेल (Pradeep Patel) ने  मऊगंज से जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में उनका भारी विरोध है,और माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता सुखेन्द्र सिंह बन्ना का दावा ज्यादा मजबूत है। गुढ़ की बात करें तो यहां से भाजपा उम्मीदवार नागेन्द्र सिंह (Nagendra Singh) जीतते रहे हैं और इस चुनाव में उन्होने फिर दावा ठोंक रखा है कांग्रेस की तरफ से कपिध्वज सिंह (Kapidhwaj Singh) का टिकट फायनल हो चुका है,दोनों तरफ से ठाकुर नेता होने के कारण यहां के राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। सिरमौर से बीजेपी की तरफ से दिब्यराज सिंह (Divyaraj Singh) हैं जो दो बार के विधायक हैं,यहां से तीन ब्राम्हण चुनाव मैदान में हैं इसलिए माना जा रहा है कि दिब्यराज एकबार फिर फतह हासिल करने में कामयाब हो सकते हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 16 Oct 2023 17:20:52 +0530</pubDate>
        <dc:creator>mukhbirmp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>Vindhya Range</media:keywords>
    </item>
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        <title>आज की सबसे बड़ी भविष्यवाणी&amp; हारे कोई भी लेकिन सरकार तो &amp;apos;कमल&amp;apos; की ही बनेगी</title>
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        <description><![CDATA[ मप्र सहित पांच राज्यों में कल से आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है (Madhya Pradesh Elections)। अगले 37 दिनों तक प्रदेश में सियासी बुखार जमकर देखने को मिलने वाला है। प्रदेश में जिस प्रकार से भाजपा और कांग्रेस सत्ता हासिल करने के लिए अपने सियासी मोहरे फिट करने में जुटे हैं उससे स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस इस चुनाव को बिल्कुल भी हल्के में नहीं ले रहे हैं। कर्नाटक चुनाव में हार के बाद जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने वहां से सीख ली है तो वहीं कांग्रेस पार्टी अति उत्साहित नजर आ रही है। जो कांग्रेस अभी तक 150-180 सीटों का दावा कर रही थी उसी कांग्रेस के पदाधिकारी कुछ एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वे को वाट्सेप ग्रुपों में वायरल कर खुश हो रहे हैं। दरअसल एक एजेंशी के सर्वे में भाजपा को 104 से 116 सीटें मिलती दिख रही हैं तो वहीं कांग्रेस को 116 से 125 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। इस प्रकार के सर्वे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है। लेकिन उन्हे यह नहीं मालूम कि चुनाव का काउनडाउन अब शुरु हुआ है। जिस भारतीय जनता पार्टी को लड़ाई में नहीं माना जा रहा था उसी भारतीय जनता पार्टी को सर्वे एजेंसियों 104 से 116 सीट तक दे रहे हैं। मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री शिवराज स़िह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) द्वारा ऐन मौके पर शुरु की गई लाड़ली बहना योजना (Ladli Behana Yojana) काम कर गई है जिसके कारण भाजपा के वोटबैंक का ग्राफ बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अलग-अलग तरह की यात्राएं निकाल कर लगातार जनता से संवाद भी किया है। भाजपा महिला मोर्चा (BJP Mahila Morcha) को भी लक्ष्य दे दिया गया है कि वो हर बूथ में जाएं वाट्सेप ग्रुप बनाएं और स्थानीय महिलाओं को ग्रुपों में जोड़ कर केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से महिला हितैषी योजनाओं का जमकर प्रचार करें जिससे महिलाओं को भावनात्मक तरीके से भाजपा से जोड़ा जाए। जनता का दिल जीतने के लिए कांग्रेस (MP Congress) की ओर से भी बहुत सारे अभियान चलाए जाते रहे हैं लेकिन कांग्रेस की कमजोरी यही रही है कि भोपाल में पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) को खुश करने के लिए नेता और कार्यकर्ता तो जुट जाते हैं लेकिन वो अभियान भोपाल से निकलने के बाद कहां जाता है और कहां खत्म होता है इसका पता आज तक नहीं चल पाया है। बात स्पष्ट है कि अगले 37 दिन मध्यप्रदेश में जमकर एमोश्नल ड्रामा देखने को मिलने वाला है। साम-दाम-दंड और भेद सभी इस चुनाव में स्पष्ट रुप से देखने को मिलने वाला है। इस बीच यह बात तय है कि सत्ता के सिंहासन की इस लड़ाई में भाजपा और कांग्रेस कितनी भी मेहनत कर लें लेकिन यह अटल सत्य है कि सरकार &#039;कमल&#039; की ही बनेगी। ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 10 Oct 2023 09:23:56 +0530</pubDate>
        <dc:creator>mukhbirmp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>Madhya Pradesh Elections</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;कैसे बनेगी भाजपा की सरकार&amp;apos;,कितनी सीटें घटेंगी और कितनी बढ़ेंगी,कमलनाथ अपने ही करीबियों के शब्दजाल में फंसे</title>
        <link>https://www.mukhbirmp.com/How-will-BJP-government-be-formed-how-many-seats-will-decrease-and-how-many-will-increase-Kamal-Nath-trapped-in-the-jargon-of-his-own-close-ones</link>
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        <description><![CDATA[ हर जगह एक ही सवाल किसकी सरकार होगी। सरकार बनेगी तो कैसे बनेगी। हर जगह गुड़ा भाग,राजनीतिक हिसाब लगाए जा रहे हैं सारे सियासी पंडित चार दीवारी में बैठ कर सरकार तय कर रहे हैं कुछ राजनीतिक पंडित टीवी डिवेट में बैठ कर सरकार बना रहे हैं (MP Elections)। कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता कहते हैं कि इस बार कांग्रेस 150 से 180 सीटों के आस पास लेकर आएगी। पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) को भी उनके करीबी सलाहकार 180 सीटों का ही सपना दिखा रहे हैं। जब उनके करीबी उनके पास से निकल जाते हैं तो फिर कमलनाथ मन में सोचते हैं कि इसमें अगर कम करो तो 140 सीट तो आ ही जाएगी। लेकिन उसके उलट भाजपा के गणित की बात करें तो वहां कुछ और ही खिचड़ी पक रही है जिस पर कांग्रेस की शायद नजर नहीं पड़ी अथवा पड़ी भी है तो कोई ध्यान नहीं देना चाहता क्योंकि कांग्रेस में विश्वास कम अति विश्वास ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। अब बात भाजपा के गणित की करते हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 127 विधायक हैं। भाजपा यह मान कर चल रही है कि 127 में 57 सीट वो हार सकती है मतलब 70 सीट भाजपा 127 वर्तमान की सीटों में बचा पाएगी। इसकी पुष्टि तो कांग्रेस की वो 66 सीटें भी कर रही हैं जहां कांग्रेस लगातार तीन बार से हार रही है और भाजपा की वो सीटें गढ़ बनी हुई हैं। 230 विधानसभा सीटों में 127 विधायक भाजपा के पास हैं। 95 वे विधायक कांग्रेस के पास हैं बांकी अन्य,सपा बसपा के पास हैं। भाजपा ने हारी हुई 103 सीट जिन्हे आकांक्षी विधानसभा सीटों का नाम भी दिया गया था। उन सीटों पर भाजपा ने करीब एक साल से ही मंथन करना शुरु कर दिया था। आकांक्षी सीटों पर भाजपा ने जमकर काम किया,हर दावेदार के हिसाब से पार्टी ने सर्वे भी कराया यही कारण है कि आकांक्षी सीटों पर जहां भाजपा के पास जिताऊ उम्मीदवार नहीं थे वहां पर भाजपा ने नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ,कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) जैसे नेताओं नेताओं को चुनाव मैदान पर उतार दिया। मतलब साफ है सरकार कैसे बनाना है भाजपा को मालूम है। भाजपा का हिसाब है कि 103 आकांक्षी सीटों में भाजपा 50 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। ऐसी स्थिति में 70 और 50 को प्लस करें तो भाजपा को 120 सीट मिल रही है और वो सरकार बना रही है। इससे कुछ ऊपर नीचे होता है तो भाजपा उस पर अलग से विचार कर रही है पार्टी के नेता अलग-अलग आप्शनों पर भी काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कमलनाथ के करीबी उन्हे 180 सीटों का सपना दिखा रहे हैं जिस पर कमलनाथ 140 सीट का आंकड़ा लेकर चल रहे हैं। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 01 Oct 2023 15:54:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>mukhbirmp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>MP Elections</media:keywords>
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